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Ekadashi · भगवान विष्णु
अपरा एकादशी माहात्म्य (असीम पुण्य प्रदायिनी)

परिचय
अपरा एकादशी माहात्म्य (असीम पुण्य प्रदायिनी) — सनातन सेवा डिजिटल भक्ति संग्रह। भगवान विष्णु से संबंधित पवित्र कथा और माहात्म्य।
अपरा एकादशी माहात्म्य (असीम पुण्य प्रदायिनी)
Ekadashi · भगवान विष्णु
【संकल्प ध्यान】
अपरा सर्वपापघ्नी सर्वपुण्यफलप्रदा। त्रिविक्रम नमस्तुभ्यं भुक्तिमुक्तिप्रदायक॥
【कथा सारांश】
ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को अपरा एकादशी कहते हैं। महिध्वज नामक एक धर्मात्मा राजा था, किंतु उसका छोटा भाई वज्रध्वज अत्यंत क्रूर और अधर्मी था। उसने ईर्ष्यावश अपने बड़े भाई की हत्या कर उसके शव को जंगल में एक पीपल के वृक्ष के नीचे गाड़ दिया। अकाल मृत्यु के कारण राजा की आत्मा प्रेत बनकर उस वृक्ष पर रहने लगी।
धौम्य ऋषि ने उस मार्ग से गुजरते हुए प्रेत को देखा और अपने तपोबल से उसका कष्ट जानकर उसे वृक्ष से उतारा। ऋषि ने स्वयं ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी (अपरा) का व्रत रखा और उसका समस्त पुण्य राजा के प्रेत को संकल्प करके अर्पित कर दिया। पुण्य मिलते ही राजा प्रेत योनि से मुक्त होकर दिव्य देह धारण कर वैकुंठ सिधारा।
【फलश्रुति】
अपरा एकादशी का व्रत रखने से ब्रह्महत्या, परनिंदा और झूठी गवाही जैसे भयंकर पापों का शमन होता है तथा साधक को अपार यश और कीर्ति की प्राप्ति होती है।
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