Ekadashi · भगवान विष्णु

पापांकुशा एकादशी माहात्म्य (समस्त पाप निवारण)

पापांकुशा एकादशी माहात्म्य (समस्त पाप निवारण)

परिचय

पापांकुशा एकादशी माहात्म्य (समस्त पाप निवारण) — सनातन सेवा डिजिटल भक्ति संग्रह। भगवान विष्णु से संबंधित पवित्र कथा और माहात्म्य।

ॐ

पापांकुशा एकादशी माहात्म्य (समस्त पाप निवारण)

Ekadashi · भगवान विष्णु

【संकल्प ध्यान】

अङ्कुशेन यथा नागो वशमेति महाबलः। तथा पापांकुशा व्रतेन पापं शाम्यति सर्वशः॥

【कथा सारांश】

आश्विन शुक्ल पक्ष की एकादशी को पापांकुशा एकादशी कहा जाता है। विंध्य पर्वत पर क्रोधन नामक एक क्रूर व्याध रहता था, जिसने जीवन भर हिंसा और पाप कर्म किए। जब जीवन का अंतिम समय निकट आया, तो यमराज के दूतों के भय से व्याकुल होकर वह अंगिरा ऋषि के पुत्र महर्षि जाबालि की शरण में गया।

महर्षि जाबालि ने उस पर दया कर आश्विन शुक्ल एकादशी को भगवान पद्मनाभ की पूजा और निराहार उपवास करने का उपदेश दिया। व्याध ने पूर्ण पश्चाताप और एकाग्रता से इस व्रत का पालन किया, जिसके पुण्य प्रभाव से उसके संपूर्ण पाप भस्म हो गए और उसे भगवान विष्णु के पार्षद आकर दिव्य विमान में ले गए।

【फलश्रुति】

पापांकुशा एकादशी का व्रत रखने से मनुष्य को यमदंड का भय नहीं रहता, समस्त मनोरथ सिद्ध होते हैं और मातृ, पितृ तथा भार्या कुल की दस-दस पीढ़ियों का उद्धार होता है।

धुन के साथ सुनें

Sanatan Seva ऐप में पापांकुशा एकादशी माहात्म्य (समस्त पाप निवारण) की ऑडियो, सुनें और अपने परिवार के साथ गाएँ।

पापांकुशा एकादशी माहात्म्य (समस्त पाप निवारण) की धुन Sanatan Seva ऐप में सुनें

संबंधित सामग्री

सभी भजनों और आरतियों पर वापस जाएँ