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Ekadashi · भगवान विष्णु
देवउठनी एकादशी माहात्म्य (प्रबोधिनी एकादशी)

परिचय
देवउठनी एकादशी माहात्म्य (प्रबोधिनी एकादशी) — सनातन सेवा डिजिटल भक्ति संग्रह। भगवान विष्णु से संबंधित पवित्र कथा और माहात्म्य।
देवउठनी एकादशी माहात्म्य (प्रबोधिनी एकादशी)
Ekadashi · भगवान विष्णु
【संकल्प ध्यान】
उत्तिष्ठोत्तिष्ठ गोविन्द उत्तिष्ठ गरुडध्वज। उत्तिष्ठ कमलाकान्त त्रैलोक्यं मङ्गलं कुरु॥
【कथा सारांश】
कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवउठनी या प्रबोधिनी एकादशी कहा जाता है। चार मास के योगनिद्रा शयन के उपरांत भगवान श्रीहरि इस पावन तिथि को जागते हैं। इस दिन शालिग्राम जी और माता तुलसी का दिव्य विवाह उत्सव मनाया जाता है तथा सभी मांगलिक व विवाह कार्यों का पुनः शुभारंभ होता है।
भगवान ब्रह्मा ने देवर्षि नारद को बताया कि कार्तिक एकादशी का माहात्म्य एक सौ अश्वमेध यज्ञों और एक हजार वाजपेय यज्ञों के समान है। जो व्यक्ति इस दिन रात्रि जागरण कर भगवान के नाम का संकीर्तन करता है, उसकी पितृ-पीढ़ियां वैकुंठ धाम में परम गति प्राप्त करती हैं।
【फलश्रुति】
प्रबोधिनी एकादशी का व्रत करने और गन्ने, सिंघाड़े, बेर तथा तुलसी दल से श्रीहरि का अर्चन करने से जन्म-जन्मांतर के संचित पाप भस्म हो जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
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