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Ekadashi · पुरुषोत्तम भगवान विष्णु
परमा एकादशी माहात्म्य (अधिकमास कृष्ण एकादशी)

परिचय
परमा एकादशी माहात्म्य (अधिकमास कृष्ण एकादशी) — सनातन सेवा डिजिटल भक्ति संग्रह। पुरुषोत्तम भगवान विष्णु से संबंधित पवित्र कथा और माहात्म्य।
परमा एकादशी माहात्म्य (अधिकमास कृष्ण एकादशी)
Ekadashi · पुरुषोत्तम भगवान विष्णु
【संकल्प ध्यान】
परमा सर्वदुःखघ्नी सर्वदारिद्र्यनाशिनी। अधिकमासे कृष्णपक्षे पूजयेत् गरुड़ध्वजम्॥
【कथा सारांश】
अधिक मास (मलमास) के कृष्ण पक्ष की एकादशी को परमा एकादशी कहते हैं। कांपिल्य नगर में सुमेधा नामक एक परम ज्ञानी किंतु अत्यंत निर्धन ब्राह्मण अपनी पतिव्रता पत्नी पवित्रा के साथ रहता था। दरिद्रता से व्याकुल होकर जब ब्राह्मण ने परदेस जाकर धन कमाने का विचार किया, तो उसकी पत्नी ने कहा कि बिना पूर्वजन्म के संचित पुण्य के कहीं भी धन नहीं मिल सकता।
उसी समय महर्षि कौण्डिन्य उनके घर पधारे। ब्राह्मण दंपति के आतिथ्य से संतुष्ट होकर ऋषि ने दरिद्रता निवारण हेतु अधिक मास कृष्ण एकादशी (परमा) का व्रत करने का उपदेश दिया। दंपति ने पांच दिन तक निर्जल रहकर यह पावन व्रत किया। व्रत पूर्ण होते ही एक धनी कुबेर-समान सेठ ने उनके घर आकर अपार स्वर्ण, अन्न और वस्त्र दान दिए, जिससे उनकी दरिद्रता सदा के लिए मिट गई।
【फलश्रुति】
परमा एकादशी का व्रत रखने से घोर दरिद्रता और आर्थिक संकट दूर होते हैं, विद्या तथा बुद्धि का विकास होता है और अंत में विष्णुलोक प्राप्त होता है।
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