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Ekadashi · मोहिनी और भगवान विष्णु
मोहिनी एकादशी माहात्म्य (सकल मोह-जाल निवारण)

परिचय
मोहिनी एकादशी माहात्म्य (सकल मोह-जाल निवारण) — सनातन सेवा डिजिटल भक्ति संग्रह। मोहिनी और भगवान विष्णु से संबंधित पवित्र कथा और माहात्म्य।
मोहिनी एकादशी माहात्म्य (सकल मोह-जाल निवारण)
Ekadashi · मोहिनी और भगवान विष्णु
【संकल्प ध्यान】
मोहिनी सर्वपापघ्नी मोहविद्राविणी तथा। वैशाखस्य सिते पक्षे पूजयेत् चक्रपाणिनम्॥
【कथा सारांश】
वैशाख शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोहिनी एकादशी कहते हैं। भद्रावती नगरी के पुण्यात्मा वैश्य धनपाल का पांचवां पुत्र धृष्टबुद्धि अत्यंत दुराचारी निकला। वह मद्यपान, जुआ और कुसंगति में लिप्त होकर पिता की संपूर्ण संपत्ति नष्ट करने लगा। अंततः पिता और भाइयों ने दुखी होकर उसे घर से निकाल दिया।
भूख-प्यास से व्याकुल होकर वह वन में भटकता हुआ महर्षि कौण्डिन्य के आश्रम पहुंचा, जो गंगा स्नान कर लौटे थे। मुनि के वस्त्रों से गिरे पवित्र जल के छींटों से उसके भीतर का विवेक जाग्रत हुआ। मुनि के उपदेश से उसने वैशाख शुक्ल एकादशी (मोहिनी) का उपवास किया, जिससे उसका चित्त निर्मल हुआ और वह वैकुंठ धाम का अधिकारी बना।
【फलश्रुति】
मोहिनी एकादशी का व्रत करने से संसार के समस्त माया-मोह, भ्रम और अज्ञान का नाश होता है तथा मनुष्य जन्म-मरण के बंधन से छूटकर मुक्त हो जाता है।
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