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Ekadashi · भगवान विष्णु
पापमोचनी एकादशी माहात्म्य (मेधावी ऋषि एवं मंजुघोषा)

परिचय
पापमोचनी एकादशी माहात्म्य (मेधावी ऋषि एवं मंजुघोषा) — सनातन सेवा डिजिटल भक्ति संग्रह। भगवान विष्णु से संबंधित पवित्र कथा और माहात्म्य।
पापमोचनी एकादशी माहात्म्य (मेधावी ऋषि एवं मंजुघोषा)
Ekadashi · भगवान विष्णु
【संकल्प ध्यान】
पापमोचनिका पुण्या सर्वपापप्रणाशिनी। चैत्रे मासि सिते पक्षे पूजयेत् जनार्दनम्॥
【कथा सारांश】
चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को पापमोचनी एकादशी कहते हैं। च्यवन ऋषि के तेजस्वी पुत्र मेधावी मुनि वन में कठिन तप कर रहे थे। देवराज इंद्र ने उनकी तपस्या भंग करने के लिए मंजुघोषा नामक अप्सरा को भेजा। मुनि रूप और काम के वशीभूत होकर दीर्घकाल तक तपस्या के व्रत से भटक गए।
विवेक जाग्रत होने पर मुनि ने मंजुघोषा को पिशाचिनी बनने का शाप दिया। पश्चाताप में डूबे दोनों ने महर्षि च्यवन से उद्धार का उपाय पूछा। महर्षि के परामर्श पर दोनों ने चैत्र कृष्ण एकादशी का विधिपूर्वक उपवास किया, जिससे मंजुघोषा पिशाच योनि से मुक्त होकर दिव्य अप्सरा बनी और मेधावी मुनि का तपोबल पुनः जाग्रत हो गया।
【फलश्रुति】
पापमोचनी एकादशी का व्रत करने से कुसंगति जनित दोष, ब्रह्महत्या तथा सुवर्ण चोरी जैसे महापापों का समूल निवारण होता है और साधक परम गति पाता है।
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